श्री राम को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासत तेज हो गई है। सपा नेत्री डिम्पल यादव द्वारा यह कहे जाने पर कि भारतीय जनता पार्टी राम के नाम पर अपनी राजनीतिक नाव पार लगाना चाहती है, इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी की नेत्री एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने सख्त लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया दी है।

श्री राम को लेकर की गई टिप्पणी पर सियासत तेज हो गई है। सपा नेत्री डिम्पल यादव द्वारा यह कहे जाने पर कि भारतीय जनता पार्टी राम के नाम पर अपनी राजनीतिक नाव पार लगाना चाहती है, इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी की नेत्री एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने सख्त लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया दी है।
अपर्णा यादव ने अपने बयान में कहा कि प्रभु श्री राम केवल किसी एक दल, संगठन या विचारधारा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे भारत के आदर्श, हमारी सनातन संस्कृति, मर्यादा और जीवन मूल्यों के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्री राम का नाम हर भारतीय के हृदय में सम्मान, आस्था और गर्व का भाव उत्पन्न करता है और यह राष्ट्रबोध से गहराई से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि श्री राम का जीवन चरित्र सत्य, त्याग, करुणा, कर्तव्य और न्याय की मिसाल है। रामत्व की भावना समाज को सदैव सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और सामाजिक समरसता, नैतिकता एवं पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करती है। ऐसे में प्रभु श्री राम को केवल राजनीतिक चश्मे से देखना न केवल अनुचित है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना को भी ठेस पहुँचाने वाला है।
अपर्णा यादव ने आगे कहा कि श्री राम का नाम सदियों से भारत की आत्मा में बसता आया है। राम केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति हैं, जिन्होंने हर वर्ग, हर पीढ़ी और हर परिस्थिति में मानवता को दिशा दिखाई है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर ही समाज सशक्त, संवेदनशील और संस्कारित बनता है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विमर्श में मर्यादा और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है, विशेषकर जब विषय भारत की आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हो। श्री राम को लेकर दिया गया कोई भी वक्तव्य पूरे समाज की भावनाओं से जुड़ा होता है, इसलिए शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
अपर्णा यादव के इस बयान को भाजपा समर्थकों,राम भक्तों एवं सैकड़ों हिन्दू व सामाजिक संगठनों द्वारा व्यापक समर्थन मिल रहा है। उनके वक्तव्य को श्री राम के सांस्कृतिक, नैतिक और राष्ट्रीय महत्व की सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है, जिसने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि प्रभु श्री राम राजनीति से ऊपर, भारत की चेतना और संस्कार का आधार हैं।