
गजनेर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में तैनात स्टाफ नर्सों ने प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुनीत पांडेय पर मनमानी, पक्षपात और तानाशाही रवैये के गंभीर आरोप लगाए हैं। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि डॉ. पांडेय की कार्यप्रणाली न सिर्फ असंवेदनशील है, बल्कि महिला कर्मचारियों के सम्मान और गरिमा को भी ठेस पहुंचा रही है।
नर्स निरंजन देवी और अन्य स्टाफ ने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना कारण छुट्टी देने से मना किया गया, जरूरत से ज्यादा ड्यूटी लगाई गई और विरोध करने पर खुलेआम धमकियां दी गईं। वहीं, कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को विशेष छूट और आराम दिया जा रहा है, जिससे कार्यस्थल पर असमानता का माहौल बन गया है।
एक नर्स ने कहा, “हम दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन जब सम्मान और न्याय की बात आती है, तो हमें चुप करा दिया जाता है। जब हमने अपनी बात प्रभारी से रखनी चाही, तो उन्होंने साफ कहा — ‘मैं जैसा चाहूं, वैसी ड्यूटी लगाऊंगा, कोई शिकायत नहीं सुनी जाएगी।’”
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग में महिला कर्मचारियों को तानाशाही और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। डॉ. पुनीत पांडेय पर इससे पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन हर बार उच्च अधिकारी इन मामलों को नजरअंदाज करते रहे हैं। आरोपों की जांच करने की बजाय उन्हें दबाने का प्रयास किया गया, जिससे पीड़ितों का भरोसा लगातार टूट रहा है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डॉ. ए. के. सिंह ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है। उन्होंने कहा कि, “यदि आरोप सही पाए गए तो उचित कार्रवाई की जाएगी। महिला स्टाफ की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होती है या एक बार फिर सच्चाई को दबा दिया जाता है।