भारतीय संस्कृति पुरातन काल से ही विभिन्न देशों की सांस्कृतिक व साहित्यिक विविधताओं के आदान-प्रदान का केंद्र रही है। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय हिंदी साहित्य के जाने-माने कवियों का एक समूह इंडो थाई संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए कवि सम्मेलन में प्रतिभाग करने के लिए थाईलैंड जा रहा है। आगामी 12 अगस्त को इंडो थाई न्यूज व डिजिटल खिड़की के संयोजन में देश के सुविख्यात कवि कुमार विश्वास, स्वयं श्रीवास्तव, रमेश मुस्कान, कविता तिवारी, हेमंत पांडे,सुरेंद्र यादवेंद्र व सोनल जैन कविता पाठ करेंगे।

श्रंगार के रस से सराबोर करेंगे स्वयं श्रीवास्तव
साहित्यिक नगरी जहां पर महाप्राण निराला जी ने काव्य लेखन कर साहित्य के प्रकाश को संपूर्ण राष्ट्र में प्रकाशित किया उसी धरती के रहने वाले देश के जाने-माने श्रृंगार रस के कवि स्वयं श्रीवास्तव थाईलैंड की धरती पर श्रृंगार रस का पाठ करेंगे स्वयं के इस अंतरराष्ट्रीय दौरे को लेकर स्थानीय कवियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है उन्नाव जनपद के प्रतिष्ठित हास्य कवि व विभिन्न कवि सम्मेलनों में स्वयं श्रीवास्तव के साथ मंच साझा करने वाले अनुभव अज्ञानी बताते हैं कि निराला की धरती में काका हाथरसी,शिवमंगल सिंह सुमन व आल्हा सम्राट लल्लू बाजपेई के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्नाव का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तित्व का अभाव हो गया था जिसको अब हम सभी के अग्रज स्वयं जी पूर्ण करेंगे।

नित्य लेखन व पाठन से ही हासिल होगी मंजिल – स्वयं श्रीवास्तव
उन्नाव की धरती से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहित्य के क्षेत्र में नाम कमाने वाले कवि स्वयं श्रीवास्तव ने बताया कि आज मैं जिस भी मुकाम पर हूं वहां पहुंचने के लिए मेरी उन्नाव की धरती के वटवृक्ष निराला जी मेरे प्रेरणा स्त्रोत रहे हैं। नित्य लेखन व पाठन से ही मैंने साहित्य को समाहित किया है। आगामी कार्यक्रम में युग कवि श्री कुमार विश्वास जी व डिजिटल खिड़की का बहुत बड़ा योगदान है मुझे पूर्ण विश्वास है कि सभी भारतवासियों व क्षेत्रवासियों का स्नेह मुझे निरंतर मिलता रहेगा। आप सभी का यह स्नेह ही है जो मुझे नित प्रतिदिन कुछ नया लिखने व पढ़ने हेतु प्रोत्साहित करता है।