बुखार में दी जाने वाली दवा Dolo इन दिनों चर्चा में है. दवा बनाने वाली कंपनी पर बिक्री बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ के गिफ्ट देने का आरोप लगा. लेकिन कंपनी ने इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. इस दवा को फार्मा कंपनी माइक्रो लैब्स लिमिटेड बनाती है. कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कम्यूनिकेशंस) जयराज गोविंदराजू ने माइक्रो लैब्स पर लगे आरोपों को ‘आधारहीन’ बताया.

गोविंद ने बताया कि हमारी कम्पनी की कुल कमाई मात्र 350 करोड़ हुई है ऐसे में ₹1000 करोड़ के गिफ्ट बांटने का तो सवाल ही नहीं उठता है।
करुणा काल में धड़ल्ले से दिखने वाली डोलो आजकल चर्चा में ही होगा। अफवाहों का बाजार इस कदर गर्म था कि लोग कह रहे थे कि उन कंपनी ने बिक्री बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को 1000 काउंटी गिफ्ट बैठकर कंपनी को आगे बढ़ाने का काम किया है लेकिन दोनों बनाने वाली फार्मा कंपनी माइक्रो लैब्स लिमिटेड के कम्युनिकेशन प्रेसिडेंट जयराज गोविंदराजू ने इन सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज कर दिया है।
क्यों फैल रही है यह अफवाह
उपरोक्त अफवाह फैलने का एक कारण यह है कि कुछ दिन पहले ही एक याचिका मैं यह बात कही गई थी कि डोलो 650 बनाने वाली फार्मा कंपनी द्वारा डॉक्टरों को यह दवाई लिखने के एवज में 1000 करोड़ रुपए के गिफ्ट बांटे गए हैं।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने याचिकाकर्ता को सुनने के बाद इसे एक गंभीर मुद्दा बताया था. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि जब उन्हें कोविड हुआ था, तो उनको भी यही दवाई (Dolo-650) लेने की सलाह दी गई थी. सुनवाई के बाद बेंच ने कहा था कि इस मामले की जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है.

जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ने ए.एस बोपन्ना की बेंच ने इस याचिका का संज्ञान में लेकर इसे एक गंभीर मुद्दा बताया था न्यायाधीश ने बताया कि पूर्णा के दौरान उन्हें भी यही दवाई लेने की सलाह दी गई थी अतः इस मामले की जांच होना अत्यंत आवश्यक है कोर्ट ने केंद्र सरकार से याचिका पर जवाब भी तलब किया था।
मीडिया में संस्थान की छवि धूमिल होते देखकर संस्थान ने सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि न्यायालय द्वारा संस्थान से किसी भी प्रकार का ब्योरा मांगा जाएगा तो हम सभी देवरा देने हेतु तैयार हैं।